गोबर का फैसला? मैं अपने दो सौ छोड़ के सत्तर ले लूँ , नहीं अदालत करूँ। इस तरह का व्यवहार हुआ तो कै दिन संसार चलेगा? और तुम बैठे सुन रहे हो, मगर यह समझ लो, मैं ब्राह्मण हूँ, मेरे रुपए हजम करके तुम चैन न पाओगे। मैंने ये सत्तर रुपए भी छोड़े, अदालत भी न जाऊँगा, जाओ। अगर मैं ब्राह्मण हूँ, तो पूरे दो सौ रुपए ले कर दिखा दूँगा, और तुम मेरे द्वार पर आवोगे और हाथ बाँध कर दोगे।
दातादीन झल्लाए हुए लौट पड़े। गोबर अपनी जगह बैठा रहा।
गोबर का फैसला? मैं अपने दो सौ छोड़ के सत्तर ले लूँ , नहीं अदालत करूँ। इस तरह का व्यवहार हुआ तो कै दिन संसार चलेगा? और तुम बैठे सुन रहे हो, मगर यह समझ लो, मैं ब्राह्मण हूँ, मेरे रुपए हजम करके तुम चैन न पाओगे। मैंने ये सत्तर रुपए भी छोड़े, अदालत भी न जाऊँगा, जाओ। अगर मैं ब्राह्मण हूँ, तो पूरे दो सौ रुपए ले कर दिखा दूँगा, और तुम मेरे द्वार पर आवोगे और हाथ बाँध कर दोगे।
दातादीन झल्लाए हुए लौट पड़े। गोबर अपनी जगह बैठा रहा।