कर सब-के-सब सतर्क हो गए। वातावरण में षड़यंत्र की-सी कुंठा भरी हुई थी।
गोबर ने उत्तेजित कंठ से पूछा - यह क्या बात है कारिंदा साहब, कि आपको दादा ने हाल तक का लगान चुकता कर दिया और आप अभी दो साल का बाकी निकाल रहे हैं? यह कैसा गोलमाल है।
नोखेराम ने मसनद पर लेट कर रोब दिखाते हुए कहा - जब तक होरी है, मैं तुमसे लेन-देन की कोई बातचीत नहीं करना चाहता।
गोबर ने आहत स्वर में कहा - तो मैं घर में कुछ नहीं हूँ?
'तुम अपने घर में सब कुछ होगे। यहाँ तुम कुछ नहीं हो।'
कर सब-के-सब सतर्क हो गए। वातावरण में षड़यंत्र की-सी कुंठा भरी हुई थी।
गोबर ने उत्तेजित कंठ से पूछा - यह क्या बात है कारिंदा साहब, कि आपको दादा ने हाल तक का लगान चुकता कर दिया और आप अभी दो साल का बाकी निकाल रहे हैं? यह कैसा गोलमाल है।
नोखेराम ने मसनद पर लेट कर रोब दिखाते हुए कहा - जब तक होरी है, मैं तुमसे लेन-देन की कोई बातचीत नहीं करना चाहता।
गोबर ने आहत स्वर में कहा - तो मैं घर में कुछ नहीं हूँ?
'तुम अपने घर में सब कुछ होगे। यहाँ तुम कुछ नहीं हो।'