वाणी में सत्य का बल था। डरपोक प्राणियों में सत्य भी गूँगा हो जाता है। वही सीमेंट, जो ईंट पर चढ़ कर पत्थर हो जाता है, मिट्टी पर चढ़ा दिया जाए, तो मिट्टी हो जायगा। गोबर की निर्भीक स्पष्टवादिता ने उस अनीति के बख्तर को बेध डाला, जिससे सज्जित हो कर नोखेराम की दुर्बल आत्मा अपने को शक्तिमान समझ रही थी।
नोखेराम ने जैसे कुछ याद करने का प्रयास करके कहा - तुम इतना गर्म क्यों हो रहे हो, इसमें गर्म होने की कौन बात है। अगर होरी ने रुपए दिए हैं,
वाणी में सत्य का बल था। डरपोक प्राणियों में सत्य भी गूँगा हो जाता है। वही सीमेंट, जो ईंट पर चढ़ कर पत्थर हो जाता है, मिट्टी पर चढ़ा दिया जाए, तो मिट्टी हो जायगा। गोबर की निर्भीक स्पष्टवादिता ने उस अनीति के बख्तर को बेध डाला, जिससे सज्जित हो कर नोखेराम की दुर्बल आत्मा अपने को शक्तिमान समझ रही थी।
नोखेराम ने जैसे कुछ याद करने का प्रयास करके कहा - तुम इतना गर्म क्यों हो रहे हो, इसमें गर्म होने की कौन बात है। अगर होरी ने रुपए दिए हैं,