तब अपना भला-बुरा नहीं सूझा था? उस घड़ी हम भी अपना भला-बुरा सोचने लगते, तो आज तेरा कहीं पता न होता।
इसके बाद संग्राम छिड़ गया। ताने-मेहने, गाली-गलौच, थुक्का-गजीहत, कोई बात न बची। गोबर भी बीच-बीच में डंक मारता जाता था। होरी बरौठे में बैठा सब कुछ सुन रहा था। सोना और रूपा आँगन में सिर झुकाए खड़ी थीं, दुलारी, पुनिया और कई स्त्रियाँ बीच-बचाव करने आ पहुँची थीं। गर्जन के बीच में कभी-कभी बूँदें भी गिर जाती थीं। दोनों ही अपने-अपने
तब अपना भला-बुरा नहीं सूझा था? उस घड़ी हम भी अपना भला-बुरा सोचने लगते, तो आज तेरा कहीं पता न होता।
इसके बाद संग्राम छिड़ गया। ताने-मेहने, गाली-गलौच, थुक्का-गजीहत, कोई बात न बची। गोबर भी बीच-बीच में डंक मारता जाता था। होरी बरौठे में बैठा सब कुछ सुन रहा था। सोना और रूपा आँगन में सिर झुकाए खड़ी थीं, दुलारी, पुनिया और कई स्त्रियाँ बीच-बचाव करने आ पहुँची थीं। गर्जन के बीच में कभी-कभी बूँदें भी गिर जाती थीं। दोनों ही अपने-अपने