वह मुग्ध हुआ जाता था। गाय इतनी सुंदर और सुडौल है, इसकी उसने कल्पना भी न की थी।
होरी ने लोभ को रोक कर कहा - मँगवा लूँगा, जल्दी क्या है?
'तुम्हें जल्दी न हो, हमें तो जल्दी है। उसे द्वार पर देख कर तुम्हें वह बात याद रहेगी।'
'उसकी मुझे बड़ी फिकर है दादा!'
'तो कल गोबर को भेज देना।'
दोनों ने अपने-अपने खाँचे सिर पर रखे और आगे बढ़े। दोनों इतने प्रसन्न थे, मानो ब्याह करके लौटे हों। होरी को तो अपने चिरसंचित अभिलाषा के पूरे होने का हर्ष था,
वह मुग्ध हुआ जाता था। गाय इतनी सुंदर और सुडौल है, इसकी उसने कल्पना भी न की थी।
होरी ने लोभ को रोक कर कहा - मँगवा लूँगा, जल्दी क्या है?
'तुम्हें जल्दी न हो, हमें तो जल्दी है। उसे द्वार पर देख कर तुम्हें वह बात याद रहेगी।'
'उसकी मुझे बड़ी फिकर है दादा!'
'तो कल गोबर को भेज देना।'
दोनों ने अपने-अपने खाँचे सिर पर रखे और आगे बढ़े। दोनों इतने प्रसन्न थे, मानो ब्याह करके लौटे हों। होरी को तो अपने चिरसंचित अभिलाषा के पूरे होने का हर्ष था,