का संयोग वह अपनी प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक समझते थे। उधर रायसाहब को ससुराली जायदाद मिलने की भी आशा थी। राजा साहब के पहलू में यह काँटा भी बुरी तरह खटक रहा था। कहीं वह जायदाद इन्हें मिल गई - और कानून रायसाहब के पक्ष में था ही - तब तो राजा साहब का एक प्रतिद्वंद्वी खड़ा हो जायगा इसलिए उनका धर्म था कि रायसाहब को कुचल डालें और उनकी प्रतिष्ठा धूल में मिला दें।
बेचारे रायसाहब बड़े संकट में पड़ गए थे। उन्हें यह संदेह होने लगा
का संयोग वह अपनी प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक समझते थे। उधर रायसाहब को ससुराली जायदाद मिलने की भी आशा थी। राजा साहब के पहलू में यह काँटा भी बुरी तरह खटक रहा था। कहीं वह जायदाद इन्हें मिल गई - और कानून रायसाहब के पक्ष में था ही - तब तो राजा साहब का एक प्रतिद्वंद्वी खड़ा हो जायगा इसलिए उनका धर्म था कि रायसाहब को कुचल डालें और उनकी प्रतिष्ठा धूल में मिला दें।
बेचारे रायसाहब बड़े संकट में पड़ गए थे। उन्हें यह संदेह होने लगा