अफसरों के पास रोज डालियाँ जाती रहती हैं। सुना है, कोई अंग्रेज मैनेजर रखने वाले हैं।'
'फिर आपने कैसे कह दिया था कि आप कोई समझौता करा देंगे?'
'मुझसे जो कुछ हो सकता था, वह मैंने किया। इसके सिवा मैं और क्या कर सकता था? अगर कोई व्यक्ति अपने दो-चार लाख रुपए फँसाने ही पर तुला हुआ हो, तो मेरा क्या बस?'
रायसाहब अब क्रोध न सँभाल सके - खास कर जब उन दो-चार लाख रुपए में से दस-बीस हजार आपके हत्थे चढ़ने की भी आशा हो।
मिस्टर तंखा अब क्यों दबते? बोले - रायसाहब,
अफसरों के पास रोज डालियाँ जाती रहती हैं। सुना है, कोई अंग्रेज मैनेजर रखने वाले हैं।'
'फिर आपने कैसे कह दिया था कि आप कोई समझौता करा देंगे?'
'मुझसे जो कुछ हो सकता था, वह मैंने किया। इसके सिवा मैं और क्या कर सकता था? अगर कोई व्यक्ति अपने दो-चार लाख रुपए फँसाने ही पर तुला हुआ हो, तो मेरा क्या बस?'
रायसाहब अब क्रोध न सँभाल सके - खास कर जब उन दो-चार लाख रुपए में से दस-बीस हजार आपके हत्थे चढ़ने की भी आशा हो।
मिस्टर तंखा अब क्यों दबते? बोले - रायसाहब,