गोविंदी ने एक क्षण सोच कर कहा - तो तुम्हीं लिख दो न।
'मैं क्यों लिखूँ? बात की तुमने, लिखूँ मैं?'
'डाक्टर साहब कारण पूछेंगे, तो क्या बताऊँगी?'
'बताना अपना सिर और क्या! मैं इस व्यभिचारशाला को एक धेला भी नहीं देना चाहता।'
'तो तुम्हें देने को कौन कहता है?'
खन्ना ने होंठ चबा कर कहा - कैसी बेसमझों की-सी बातें करती हो? तुम वहाँ नींव रखोगी और कुछ दोगी नहीं, तो संसार क्या कहेगा?
गोविंदी ने जैसे संगीन की नोक पर कहा - अच्छी बात है, लिख दूँगी।
गोविंदी ने एक क्षण सोच कर कहा - तो तुम्हीं लिख दो न।
'मैं क्यों लिखूँ? बात की तुमने, लिखूँ मैं?'
'डाक्टर साहब कारण पूछेंगे, तो क्या बताऊँगी?'
'बताना अपना सिर और क्या! मैं इस व्यभिचारशाला को एक धेला भी नहीं देना चाहता।'
'तो तुम्हें देने को कौन कहता है?'
खन्ना ने होंठ चबा कर कहा - कैसी बेसमझों की-सी बातें करती हो? तुम वहाँ नींव रखोगी और कुछ दोगी नहीं, तो संसार क्या कहेगा?
गोविंदी ने जैसे संगीन की नोक पर कहा - अच्छी बात है, लिख दूँगी।