बातें कह सुनाने का अवसर पा कर छोड़ना न चाहते थे। यह भी दिखा देना चाहते थे कि मैं निरा भोंदू नहीं हूँ। उसका रास्ता रोक कर बोले - तुम मुझ पर इतनी कृपालु हो गई हो, इस पर मुझे आश्चर्य हो रहा है मालती!
मालती ने भवें सिकोड़ कर कहा - मैं इसका आशय नहीं समझी!
'क्या अब मेरे साथ तुम्हारा वही बर्ताव है, जो कुछ दिन पहले था?'
'मैं तो उसमें कोई अंतर नहीं देखती।'
'लेकिन मैं तो आकाश-पाताल का अंतर देखता हूँ।'
'अच्छा मान लो, तुम्हारा अनुमान ठीक है,
बातें कह सुनाने का अवसर पा कर छोड़ना न चाहते थे। यह भी दिखा देना चाहते थे कि मैं निरा भोंदू नहीं हूँ। उसका रास्ता रोक कर बोले - तुम मुझ पर इतनी कृपालु हो गई हो, इस पर मुझे आश्चर्य हो रहा है मालती!
मालती ने भवें सिकोड़ कर कहा - मैं इसका आशय नहीं समझी!
'क्या अब मेरे साथ तुम्हारा वही बर्ताव है, जो कुछ दिन पहले था?'
'मैं तो उसमें कोई अंतर नहीं देखती।'
'लेकिन मैं तो आकाश-पाताल का अंतर देखता हूँ।'
'अच्छा मान लो, तुम्हारा अनुमान ठीक है,