गोदान - Godan

जैसे सिकुड़ गया हो। झेंपते हुए बोले - मेरा आशय यह न था मालती, तुम बिलकुल गलत समझीं।

मालती ने परिहास के स्वर में कहा - खुदा करे, मैंने गलत समझा हो, क्योंकि अगर मैं उसे सच समझ लूँगी तो तुम्हारे साए से भी भागूँगी। मैं रूपवती हूँ। तुम भी मेरे अनेक चाहने वालों में से एक हो। वह मेरी कृपा थी कि जहाँ मैं औरों के उपहार लौटा देती थी, तुम्हारी सामान्य-से-सामान्य चीजें भी धन्यवाद के साथ स्वीकार कर लेती थी, और जरूरत पड़ने पर तुमसे


1147 of 1753

जैसे सिकुड़ गया हो। झेंपते हुए बोले - मेरा आशय यह न था मालती, तुम बिलकुल गलत समझीं।

मालती ने परिहास के स्वर में कहा - खुदा करे, मैंने गलत समझा हो, क्योंकि अगर मैं उसे सच समझ लूँगी तो तुम्हारे साए से भी भागूँगी। मैं रूपवती हूँ। तुम भी मेरे अनेक चाहने वालों में से एक हो। वह मेरी कृपा थी कि जहाँ मैं औरों के उपहार लौटा देती थी, तुम्हारी सामान्य-से-सामान्य चीजें भी धन्यवाद के साथ स्वीकार कर लेती थी, और जरूरत पड़ने पर तुमसे


1147 of 1753