गोदान - Godan

बहू ने गोबर को फोड़ ही लिया, तो तू इतना कुढ़ती क्यों है? जो सारा जमाना करता है, वही गोबर ने भी किया। अब उसके बाल-बच्चे हुए। मेरे बाल-बच्चों के लिए क्यों अपनी साँसत कराए, क्यों हमारे सिर का बोझ अपने सिर रखे!

'तुम्हीं उपद्रव की जड़ हो।'

'तो मुझे भी निकाल दे। ले जा बैलों को, अनाज माँड़। मैं हुक्का पीता हूँ।'

'तुम चल कर चक्की पीसो, मैं अनाज माँड़ूगी।'

विनोद में दु:ख उड़ गया। वही उसकी दवा है। धनिया प्रसन्न हो कर रूपा के बाल गूँधने बैठ गई,


1156 of 1753

बहू ने गोबर को फोड़ ही लिया, तो तू इतना कुढ़ती क्यों है? जो सारा जमाना करता है, वही गोबर ने भी किया। अब उसके बाल-बच्चे हुए। मेरे बाल-बच्चों के लिए क्यों अपनी साँसत कराए, क्यों हमारे सिर का बोझ अपने सिर रखे!

'तुम्हीं उपद्रव की जड़ हो।'

'तो मुझे भी निकाल दे। ले जा बैलों को, अनाज माँड़। मैं हुक्का पीता हूँ।'

'तुम चल कर चक्की पीसो, मैं अनाज माँड़ूगी।'

विनोद में दु:ख उड़ गया। वही उसकी दवा है। धनिया प्रसन्न हो कर रूपा के बाल गूँधने बैठ गई,


1156 of 1753