शोभा और स्फूरती में जैसे डूब गया। तरंग में आ कर गाने लगा -
'हिया जरत रहत दिन-रैन।
आम की डरिया कोयल बोले,
तनिक न आवत चैन।'
सामने से दुलारी सहुआइन, गुलाबी साड़ी पहने चली आ रही थी। पाँव में मोटे चाँदी के कड़े थे, गले में मोटे सोने की हँसली, चेहरा सूखा हुआ, पर दिल हरा। एक समय था, जब होरी खेत-खलिहान में उसे छेड़ा करता था। वह भाभी थी, होरी देवर था; इस नाते दोनों में विनोद होता रहता था। जब से साहजी मर गए, दुलारी ने घर
शोभा और स्फूरती में जैसे डूब गया। तरंग में आ कर गाने लगा -
'हिया जरत रहत दिन-रैन।
आम की डरिया कोयल बोले,
तनिक न आवत चैन।'
सामने से दुलारी सहुआइन, गुलाबी साड़ी पहने चली आ रही थी। पाँव में मोटे चाँदी के कड़े थे, गले में मोटे सोने की हँसली, चेहरा सूखा हुआ, पर दिल हरा। एक समय था, जब होरी खेत-खलिहान में उसे छेड़ा करता था। वह भाभी थी, होरी देवर था; इस नाते दोनों में विनोद होता रहता था। जब से साहजी मर गए, दुलारी ने घर