की तीलियों से सिर टकरा कर मर ही क्यों न जाना पड़े। सिलिया सोच रही थी, अब उसके लिए दूसरा कौन-सा ठौर है। वह ब्याहता न हो कर भी संस्कार में और व्यवहार में और मनोभावना में ब्याहता थी, और अब मातादीन चाहे उसे मारे या काटे, उसे दूसरा आश्रय नहीं है, दूसरा अवलंब नहीं है। उसे वह दिन याद आए - और अभी दो साल भी तो नहीं हुए? जब यही मातादीन उसके तलवे सहलाता था, जब उसने जनेऊ हाथ में ले कर कहा था - सिलिया, जब तक दम में दम है, तुझे ब्याहता की तरह रखूँगा,
की तीलियों से सिर टकरा कर मर ही क्यों न जाना पड़े। सिलिया सोच रही थी, अब उसके लिए दूसरा कौन-सा ठौर है। वह ब्याहता न हो कर भी संस्कार में और व्यवहार में और मनोभावना में ब्याहता थी, और अब मातादीन चाहे उसे मारे या काटे, उसे दूसरा आश्रय नहीं है, दूसरा अवलंब नहीं है। उसे वह दिन याद आए - और अभी दो साल भी तो नहीं हुए? जब यही मातादीन उसके तलवे सहलाता था, जब उसने जनेऊ हाथ में ले कर कहा था - सिलिया, जब तक दम में दम है, तुझे ब्याहता की तरह रखूँगा,