रहती है, दूसरों से क्या मतलब? कहते हैं, यहाँ तेरा अपमान होता है, तब क्या कोई बाँभन उसका पकाया खा लेगा? उसके हाथ का पानी पी लेगा? अभी जरा देर पहले उसका मन मातादीन के निठुर व्यवहार से खिन्न हो रहा था, पर अपने घर वालों और बिरादरी के इस अत्याचार ने उस विराग को प्रचंड अनुराग का रूप दे दिया।
विद्रोह-भरे मन से बोली - मैं कहीं नहीं जाऊँगी। तू क्या यहाँ भी मुझे जीने न देगी?
बुढ़िया कर्कश स्वर से बोली - तू न चलेगी?
'नहीं।'
रहती है, दूसरों से क्या मतलब? कहते हैं, यहाँ तेरा अपमान होता है, तब क्या कोई बाँभन उसका पकाया खा लेगा? उसके हाथ का पानी पी लेगा? अभी जरा देर पहले उसका मन मातादीन के निठुर व्यवहार से खिन्न हो रहा था, पर अपने घर वालों और बिरादरी के इस अत्याचार ने उस विराग को प्रचंड अनुराग का रूप दे दिया।
विद्रोह-भरे मन से बोली - मैं कहीं नहीं जाऊँगी। तू क्या यहाँ भी मुझे जीने न देगी?
बुढ़िया कर्कश स्वर से बोली - तू न चलेगी?
'नहीं।'