था। जीवन में ऐसा सुखद अनुभव उसे न हुआ था। रास्ते में सोभा के घर गया और सगाई ले कर चलने के लिए नेवता दे आया। फिर दोनों दातादीन के पास सगाई की सायत पूछने गए। वहाँ से आ कर द्वार पर सगाई की तैयारियों की सलाह करने लगे।
धनिया ने बाहर आ कर कहा - पहर रात गई, अभी रोटी खाने की बेला नहीं आई? खा कर बैठो। गपड़चौथ करने को तो सारी रात पड़ी है।
होरी ने उसे भी परामर्श में शरीक होने का अनुरोध करते हुए कहा - इसी सहालग में लगन ठीक हुआ है। बता,
था। जीवन में ऐसा सुखद अनुभव उसे न हुआ था। रास्ते में सोभा के घर गया और सगाई ले कर चलने के लिए नेवता दे आया। फिर दोनों दातादीन के पास सगाई की सायत पूछने गए। वहाँ से आ कर द्वार पर सगाई की तैयारियों की सलाह करने लगे।
धनिया ने बाहर आ कर कहा - पहर रात गई, अभी रोटी खाने की बेला नहीं आई? खा कर बैठो। गपड़चौथ करने को तो सारी रात पड़ी है।
होरी ने उसे भी परामर्श में शरीक होने का अनुरोध करते हुए कहा - इसी सहालग में लगन ठीक हुआ है। बता,