'तुम-जैसों को छोड़ कर उसके पास और जायगा ही कौन?'
'उसके द्वार पर अच्छे-अच्छे नाक रगड़ते हैं, धनिया, तू क्या जाने। उसके पास लच्छमी है।'
'उसने जरा-सी हामी भर दी, तुम चारों ओर खुसखबरी ले कर दौड़े।'
'हामी नहीं भर दी, पक्का वादा किया है।'
होरी रोटी खाने गया और सोभा अपने घर चला गया तो सोना सिलिया के साथ बाहर निकली। वह द्वार पर खड़ी सारी बातें सुन रही थी। उसकी सगाई के लिए दो सौ रुपए दुलारी से उधार लिए जा रहे हैं, यह बात उसके पेट में इस तरह खलबली मचा रही थी,
'तुम-जैसों को छोड़ कर उसके पास और जायगा ही कौन?'
'उसके द्वार पर अच्छे-अच्छे नाक रगड़ते हैं, धनिया, तू क्या जाने। उसके पास लच्छमी है।'
'उसने जरा-सी हामी भर दी, तुम चारों ओर खुसखबरी ले कर दौड़े।'
'हामी नहीं भर दी, पक्का वादा किया है।'
होरी रोटी खाने गया और सोभा अपने घर चला गया तो सोना सिलिया के साथ बाहर निकली। वह द्वार पर खड़ी सारी बातें सुन रही थी। उसकी सगाई के लिए दो सौ रुपए दुलारी से उधार लिए जा रहे हैं, यह बात उसके पेट में इस तरह खलबली मचा रही थी,