समझती है, सारी दुनिया पर उसका राज है। बोले - तू तो ऐसी तिनक रही है नोहरी, जैसे अब किसी को गाँव में रहने न देगी। जरा जबान सँभाल कर बातें किया कर, इतनी जल्द अपने को न भूल जा।
'तो क्या तुम्हारे द्वार कभी भीख माँगने आई थी?'
'नोखेराम ने छाँह न दी होती, तो भीख भी माँगती।'
नोहरी को लाल मिर्च-सा लगा। जो कुछ मुँह में आया, बका - दाढ़ीजार, लंपट, मुँह-झौंसा और जाने क्या-क्या कहा और उसी क्रोध में भरी हुई कोठरी में गई और अपने बरतन-भाँड़े निकाल-निकाल कर बाहर रखने लगी।
समझती है, सारी दुनिया पर उसका राज है। बोले - तू तो ऐसी तिनक रही है नोहरी, जैसे अब किसी को गाँव में रहने न देगी। जरा जबान सँभाल कर बातें किया कर, इतनी जल्द अपने को न भूल जा।
'तो क्या तुम्हारे द्वार कभी भीख माँगने आई थी?'
'नोखेराम ने छाँह न दी होती, तो भीख भी माँगती।'
नोहरी को लाल मिर्च-सा लगा। जो कुछ मुँह में आया, बका - दाढ़ीजार, लंपट, मुँह-झौंसा और जाने क्या-क्या कहा और उसी क्रोध में भरी हुई कोठरी में गई और अपने बरतन-भाँड़े निकाल-निकाल कर बाहर रखने लगी।