भोला ने जी कड़ा करके कहा - तुम्हें जाने को तो मैं नहीं कहता। मैं तो अपने को कहता हूँ।
'तुम मुझे छोड़ कर चले जाओगे? कहते लाज नहीं आती?'
'लाज तो घोल कर पी गया।'
'लेकिन मैंने तो अपनी लाज नहीं पी। तुम मुझे छोड़ कर नहीं जा सकते।'
'तू अपने मन की है, तो मैं तेरी गुलामी क्यों करूँ?'
'पंचायत करके मुँह में कालिख लगा दूँगी, इतना समझ लेना।'
'क्या अभी कुछ कम कालिख लगी है? क्या अब भी मुझे धोखे में रखना चाहती है?'
'तुम तो ऐसा ताव दिखा रहे हो,
भोला ने जी कड़ा करके कहा - तुम्हें जाने को तो मैं नहीं कहता। मैं तो अपने को कहता हूँ।
'तुम मुझे छोड़ कर चले जाओगे? कहते लाज नहीं आती?'
'लाज तो घोल कर पी गया।'
'लेकिन मैंने तो अपनी लाज नहीं पी। तुम मुझे छोड़ कर नहीं जा सकते।'
'तू अपने मन की है, तो मैं तेरी गुलामी क्यों करूँ?'
'पंचायत करके मुँह में कालिख लगा दूँगी, इतना समझ लेना।'
'क्या अभी कुछ कम कालिख लगी है? क्या अब भी मुझे धोखे में रखना चाहती है?'
'तुम तो ऐसा ताव दिखा रहे हो,