गोदान - Godan

से ले लेंगे। कन्यादान का फल भी क्यों बाहर जाए?'

'कितने रुपए चाहिए?'

'तुम कितने दे सकोगी?'

'सौ में काम चल जायगा?'

होरी को लालच आया। भगवान ने छप्पर फाड़ कर रुपए दिए हैं, तो जितना ले सके, उतना क्यों न ले।

'सौ में भी चल जायगा। पाँच सौ में भी चल जायगा। जैसा हौसला हो।'

'मेरे पास कुल दो सौ रुपए हैं, वह मैं दे दूँगी।'

'तो इतने में बड़ी खुसफेली से काम चल जायगा। अनाज घर में है, मगर ठकुराइन, आज तुमसे कहता हूँ, मैं


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से ले लेंगे। कन्यादान का फल भी क्यों बाहर जाए?'

'कितने रुपए चाहिए?'

'तुम कितने दे सकोगी?'

'सौ में काम चल जायगा?'

होरी को लालच आया। भगवान ने छप्पर फाड़ कर रुपए दिए हैं, तो जितना ले सके, उतना क्यों न ले।

'सौ में भी चल जायगा। पाँच सौ में भी चल जायगा। जैसा हौसला हो।'

'मेरे पास कुल दो सौ रुपए हैं, वह मैं दे दूँगी।'

'तो इतने में बड़ी खुसफेली से काम चल जायगा। अनाज घर में है, मगर ठकुराइन, आज तुमसे कहता हूँ, मैं


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