'तो सबेरे आ जाना, रुपए दे दूँगी।'
'कुछ लिखा-पढ़ी.......।'
'तुम मेरे रुपए हजम न करोगे, मैं जानती हूँ।'
उसका घर आ गया था। वह अंदर चली गई। होरी घर लौटा।
भाग 27
गोबर को शहर आने पर मालूम हुआ कि जिस अड्डे पर वह अपना खोंचा ले कर बैठता था, वहाँ एक दूसरा खोंचे वाला बैठने लगा है और गाहक अब गोबर को भूल गए हैं। वह घर भी अब उसे पिंजरे-सा लगता था। झुनिया उसमें अकेली बैठी रोया करती। लड़का दिन-भर आँगन में या द्वार पर खेलने
'तो सबेरे आ जाना, रुपए दे दूँगी।'
'कुछ लिखा-पढ़ी.......।'
'तुम मेरे रुपए हजम न करोगे, मैं जानती हूँ।'
उसका घर आ गया था। वह अंदर चली गई। होरी घर लौटा।
भाग 27
गोबर को शहर आने पर मालूम हुआ कि जिस अड्डे पर वह अपना खोंचा ले कर बैठता था, वहाँ एक दूसरा खोंचे वाला बैठने लगा है और गाहक अब गोबर को भूल गए हैं। वह घर भी अब उसे पिंजरे-सा लगता था। झुनिया उसमें अकेली बैठी रोया करती। लड़का दिन-भर आँगन में या द्वार पर खेलने