न अपने खाने-पीने की। जब गोबर उसे मारता, तो उसे ऐसा क्रोध आता कि गोबर का गला छुरे से रेत डाले। गर्भ ज्यों-ज्यों पूरा होता जाता है, उसकी चिंता बढ़ती जाती है। इस घर में तो उसकी मरन हो जायगी। कौन उसकी देखभाल करेगा, कौन उसे सँभालेगा? और जो गोबर इसी तरह मारता-पीटता रहा, तब तो उसका जीवन नरक ही हो जायगा।
एक दिन वह बंबे पर पानी भरने गई, तो पड़ोस की एक स्त्री ने पूछा - कै महीने है रे?
झुनिया ने लजा कर कहा - क्या जाने दीदी, मैंने तो गिना-गिनाया नहीं है।
न अपने खाने-पीने की। जब गोबर उसे मारता, तो उसे ऐसा क्रोध आता कि गोबर का गला छुरे से रेत डाले। गर्भ ज्यों-ज्यों पूरा होता जाता है, उसकी चिंता बढ़ती जाती है। इस घर में तो उसकी मरन हो जायगी। कौन उसकी देखभाल करेगा, कौन उसे सँभालेगा? और जो गोबर इसी तरह मारता-पीटता रहा, तब तो उसका जीवन नरक ही हो जायगा।
एक दिन वह बंबे पर पानी भरने गई, तो पड़ोस की एक स्त्री ने पूछा - कै महीने है रे?
झुनिया ने लजा कर कहा - क्या जाने दीदी, मैंने तो गिना-गिनाया नहीं है।