'उन्हें मेरी क्या फिकर!'
'हाँ, देख तो रही हूँ। तुम तो सौर में बैठोगी, कोई करने-धरने वाला चाहिए कि नहीं? सास-ननद, देवरानी-जेठानी, कोई है कि नहीं? किसी को बुला लेना था।'
'मेरे लिए सब मर गए।'
वह पानी ला कर जूठे बरतन माँजने लगी, तो प्रसव की शंका से हृदय में धड़कनें हो रही थीं। सोचने लगी - कैसे क्या होगा भगवान? उँह! यही तो होगा, मर जाऊँगी, अच्छा है, जंजाल से छूट जाऊँगी।
शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति
'उन्हें मेरी क्या फिकर!'
'हाँ, देख तो रही हूँ। तुम तो सौर में बैठोगी, कोई करने-धरने वाला चाहिए कि नहीं? सास-ननद, देवरानी-जेठानी, कोई है कि नहीं? किसी को बुला लेना था।'
'मेरे लिए सब मर गए।'
वह पानी ला कर जूठे बरतन माँजने लगी, तो प्रसव की शंका से हृदय में धड़कनें हो रही थीं। सोचने लगी - कैसे क्या होगा भगवान? उँह! यही तो होगा, मर जाऊँगी, अच्छा है, जंजाल से छूट जाऊँगी।
शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति