तब कहीं दूध उतरेगा। तब तक तो इस माँस के लोथड़े का ही काम तमाम हो जायगा।
पहर रात हो गई थी। गोबर ताड़ी पिए ओसारे में पड़ा हुआ था। चुहिया बच्चे को चुप कराने के लिए उसके मुँह में अपने छाती डाले हुए थी कि सहसा उसे ऐसा मालूम हुआ कि उसकी छाती में दूध आ गया है। प्रसन्न हो कर बोली - ले झुनिया, अब तेरा बच्चा जी जायगा, मेरे दूध आ गया।
झुनिया ने चकित हो कर कहा - तुम्हें दूध आ गया?
'नहीं री, सच।'
'मैं तो नहीं पतियाती।'
'देख ले!'
तब कहीं दूध उतरेगा। तब तक तो इस माँस के लोथड़े का ही काम तमाम हो जायगा।
पहर रात हो गई थी। गोबर ताड़ी पिए ओसारे में पड़ा हुआ था। चुहिया बच्चे को चुप कराने के लिए उसके मुँह में अपने छाती डाले हुए थी कि सहसा उसे ऐसा मालूम हुआ कि उसकी छाती में दूध आ गया है। प्रसन्न हो कर बोली - ले झुनिया, अब तेरा बच्चा जी जायगा, मेरे दूध आ गया।
झुनिया ने चकित हो कर कहा - तुम्हें दूध आ गया?
'नहीं री, सच।'
'मैं तो नहीं पतियाती।'
'देख ले!'