कि मिल-मालिकों को कुछ दिन याद रहे। मजूरों को भी ऐसी हड़ताल से क्षति पहुँचेगी, यहाँ तक कि हजारों आदमी रोटियों को भी मोहताज हो जाएँगे, इस पहलू की ओर उनकी निगाह बिलकुल न थी। और गोबर हड़तालियों में सबसे आगे था। उद्दंड स्वभाव का था ही, ललकारने की जरूरत थी। फिर वह मारने-मरने को न डरता था। एक दिन झुनिया ने उसे जी कड़ा करके समझाया भी - तुम बाल-बच्चे वाले आदमी हो, तुम्हारा इस तरह आग में कूदना अच्छा नहीं। इस पर गोबर बिगड़ उठा -
कि मिल-मालिकों को कुछ दिन याद रहे। मजूरों को भी ऐसी हड़ताल से क्षति पहुँचेगी, यहाँ तक कि हजारों आदमी रोटियों को भी मोहताज हो जाएँगे, इस पहलू की ओर उनकी निगाह बिलकुल न थी। और गोबर हड़तालियों में सबसे आगे था। उद्दंड स्वभाव का था ही, ललकारने की जरूरत थी। फिर वह मारने-मरने को न डरता था। एक दिन झुनिया ने उसे जी कड़ा करके समझाया भी - तुम बाल-बच्चे वाले आदमी हो, तुम्हारा इस तरह आग में कूदना अच्छा नहीं। इस पर गोबर बिगड़ उठा -