गोदान - Godan

बातें सोचती है बेटी! यह तेरे सिंदूर का भाग है कि यह बच गए। मगर हाँ, इतना है कि आपस में लड़ाई हो, तो मुँह से चाहे जितना बक ले, मन में कीना न पाले। बीज अंदर पड़ा, तो अँखुआ निकले बिना नहीं रहता।

झुनिया ने कंपन-भरे स्वर में पूछा - अब मैं क्या करूँ दीदी?

चुहिया ने ढाढ़स दिया - कुछ नहीं बेटी! भगवान का नाम ले। वही गरीबों की रक्षा करते हैं।

उसी समय गोबर ने आँखें खोली और झुनिया को सामने देख कर याचना भाव से क्षीण स्वर में


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बातें सोचती है बेटी! यह तेरे सिंदूर का भाग है कि यह बच गए। मगर हाँ, इतना है कि आपस में लड़ाई हो, तो मुँह से चाहे जितना बक ले, मन में कीना न पाले। बीज अंदर पड़ा, तो अँखुआ निकले बिना नहीं रहता।

झुनिया ने कंपन-भरे स्वर में पूछा - अब मैं क्या करूँ दीदी?

चुहिया ने ढाढ़स दिया - कुछ नहीं बेटी! भगवान का नाम ले। वही गरीबों की रक्षा करते हैं।

उसी समय गोबर ने आँखें खोली और झुनिया को सामने देख कर याचना भाव से क्षीण स्वर में


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