सिर में चोट आ गई है और हाथ की हड्डी उतर गई है। ऐसी चोटें मरदों को रोज ही लगा करती हैं। इन चोटों से कोई नहीं मरता।'
'अब मैं झुनिया को कभी न मारूँगा।'
'डरते होगे कि कहीं झुनिया तुम्हें न मारे।
'वह मारेगी भी, तो कुछ न बोलूँगा।
'अच्छे होने पर भूल जाओगे।'
'नहीं दीदी, कभी न भूलूँगा।
गोबर इस समय बच्चों-सी बातें किया करता। दस-पाँच मिनट अचेत-सा पड़ा रहता। उसका मन न जाने कहाँ-कहाँ उड़ता फिरता। कभी देखता, वह नदी में डूबा जा रहा है,
सिर में चोट आ गई है और हाथ की हड्डी उतर गई है। ऐसी चोटें मरदों को रोज ही लगा करती हैं। इन चोटों से कोई नहीं मरता।'
'अब मैं झुनिया को कभी न मारूँगा।'
'डरते होगे कि कहीं झुनिया तुम्हें न मारे।
'वह मारेगी भी, तो कुछ न बोलूँगा।
'अच्छे होने पर भूल जाओगे।'
'नहीं दीदी, कभी न भूलूँगा।
गोबर इस समय बच्चों-सी बातें किया करता। दस-पाँच मिनट अचेत-सा पड़ा रहता। उसका मन न जाने कहाँ-कहाँ उड़ता फिरता। कभी देखता, वह नदी में डूबा जा रहा है,