जैसे गृहस्थी के भार ने यौवन को दबा कर बौना कर दिया हो।
सिर को एक झटका दे कर बोली - जा, तू गोबर पाथ। जब तू दूध दुह कर रखेगी तो मैं पी जाऊँगी।
'मैं दूध की हाँड़ी ताले में बंद करके रखूँगी।'
'मैं ताला तोड़ कर दूध निकाल लाऊँगी।'
यह कहती हुई वह बाग की तरफ चल दी। आम गदरा गए थे। हवा के झोंकों से एकाध जमीन पर गिर पड़ते थे, लू के मारे चुचके, पीले, लेकिन बाल-वृंद उन्हें टपके समझ कर बाग को घेरे रहते थे। रूपा भी बहन के पीछे हो ली। जो काम सोना करे,
जैसे गृहस्थी के भार ने यौवन को दबा कर बौना कर दिया हो।
सिर को एक झटका दे कर बोली - जा, तू गोबर पाथ। जब तू दूध दुह कर रखेगी तो मैं पी जाऊँगी।
'मैं दूध की हाँड़ी ताले में बंद करके रखूँगी।'
'मैं ताला तोड़ कर दूध निकाल लाऊँगी।'
यह कहती हुई वह बाग की तरफ चल दी। आम गदरा गए थे। हवा के झोंकों से एकाध जमीन पर गिर पड़ते थे, लू के मारे चुचके, पीले, लेकिन बाल-वृंद उन्हें टपके समझ कर बाग को घेरे रहते थे। रूपा भी बहन के पीछे हो ली। जो काम सोना करे,