गोदान - Godan

चाहे कुछ हो जाय, मगर अभी जिंदगी के दो बड़े-बड़े काम सिर पर सवार थे। गोबर और सोना का विवाह। बहुत हाथ बाँधने पर भी तीन सौ से कम खर्च न होंगे। ये तीन सौ किसके घर से आएँगे? कितना चाहता है कि किसी से एक पैसा कर्ज न ले, जिसका आता हो, उसका पाई-पाई चुका दे, लेकिन हर तरह का कष्ट उठाने पर भी गला नहीं छूटता। इसी तरह सूद बढ़ता जायगा और एक दिन उसका घर-द्वार सब नीलाम हो जायगा उसके बाल-बच्चे निराश्रय हो कर भीख माँगते फिरेंगे। होरी जब काम-धंधों से छुट्टी पा कर चिलम पीने लगता था,


159 of 1753

चाहे कुछ हो जाय, मगर अभी जिंदगी के दो बड़े-बड़े काम सिर पर सवार थे। गोबर और सोना का विवाह। बहुत हाथ बाँधने पर भी तीन सौ से कम खर्च न होंगे। ये तीन सौ किसके घर से आएँगे? कितना चाहता है कि किसी से एक पैसा कर्ज न ले, जिसका आता हो, उसका पाई-पाई चुका दे, लेकिन हर तरह का कष्ट उठाने पर भी गला नहीं छूटता। इसी तरह सूद बढ़ता जायगा और एक दिन उसका घर-द्वार सब नीलाम हो जायगा उसके बाल-बच्चे निराश्रय हो कर भीख माँगते फिरेंगे। होरी जब काम-धंधों से छुट्टी पा कर चिलम पीने लगता था,


159 of 1753