न होते हुए भी बुरा न था। उनसे बहुत-सी मुआमले की बातें करनी थीं। खुर्शेद और तंखा बच रहे। उनकी टोली बनी-बनाई थी। तीनों टोलियाँ एक-एक तरफ चल दीं।
कुछ दूर तक पथरीली पगडंडी पर मेहता के साथ चलने के बाद मालती ने कहा - तुम तो चले ही जाते हो। जरा दम ले लेने दो।
मेहता मुस्कराए - अभी तो हम एक मील भी नहीं आए। अभी से थक गईं?
'थकी नहीं, लेकिन क्यों न जरा दम ले लो।'
'जब तक कोई शिकार हाथ न आ जाय, हमें आराम करने का अधिकार नहीं।'
न होते हुए भी बुरा न था। उनसे बहुत-सी मुआमले की बातें करनी थीं। खुर्शेद और तंखा बच रहे। उनकी टोली बनी-बनाई थी। तीनों टोलियाँ एक-एक तरफ चल दीं।
कुछ दूर तक पथरीली पगडंडी पर मेहता के साथ चलने के बाद मालती ने कहा - तुम तो चले ही जाते हो। जरा दम ले लेने दो।
मेहता मुस्कराए - अभी तो हम एक मील भी नहीं आए। अभी से थक गईं?
'थकी नहीं, लेकिन क्यों न जरा दम ले लो।'
'जब तक कोई शिकार हाथ न आ जाय, हमें आराम करने का अधिकार नहीं।'