गोदान - Godan

जिससे उसका उभरा हुआ वक्ष साफ झलक रहा था, आ कर खड़ी हो गई और मालती को आँखें बंद किए पड़ी देख कर बोली - बाई को क्या हो गया है?

'मेहता बोले- सिर में बड़ा दर्द है।

'पूरे सिर में है कि आधे में?'

'आधे में बतलाती हैं।'

'दाईं ओर है, कि बाईं ओर?'

'बाईं ओर।'

'मैं अभी दौड़ के एक दवा लाती हूँ। घिस कर लगाते ही अच्छा हो जायगा।'

'तुम इस धूप में कहाँ जाओगी?'

युवती ने सुना ही नहीं। वेग से एक ओर जा कर पहाड़ियों में छिप


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जिससे उसका उभरा हुआ वक्ष साफ झलक रहा था, आ कर खड़ी हो गई और मालती को आँखें बंद किए पड़ी देख कर बोली - बाई को क्या हो गया है?

'मेहता बोले- सिर में बड़ा दर्द है।

'पूरे सिर में है कि आधे में?'

'आधे में बतलाती हैं।'

'दाईं ओर है, कि बाईं ओर?'

'बाईं ओर।'

'मैं अभी दौड़ के एक दवा लाती हूँ। घिस कर लगाते ही अच्छा हो जायगा।'

'तुम इस धूप में कहाँ जाओगी?'

युवती ने सुना ही नहीं। वेग से एक ओर जा कर पहाड़ियों में छिप


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