जो सूख गए थे। बंदूक उठाई और चलने को तैयार हुए। मालती ने फुंकार मारी - तुम नहीं जा सकते, मुझे अकेली छोड़ कर।
'तब कौन जायगा?'
'वही तुम्हारी देवी।'
मेहता हतबुद्धि-से खड़े थे। नारी पुरुष पर कितनी आसानी से विजय पा सकती है, इसका आज उन्हें जीवन में पहला अनुभव हुआ।
वह दौड़ती-हाँफती चली आ रही थी। वही कलूटी युवती, हाथ में एक झाड़ लिए हुए। समीप आ कर मेहता को कहीं जाने को तैयार देख कर बोली - मैं वह जड़ी खोज लाई। अभी घिस कर लगाती हूँ,
जो सूख गए थे। बंदूक उठाई और चलने को तैयार हुए। मालती ने फुंकार मारी - तुम नहीं जा सकते, मुझे अकेली छोड़ कर।
'तब कौन जायगा?'
'वही तुम्हारी देवी।'
मेहता हतबुद्धि-से खड़े थे। नारी पुरुष पर कितनी आसानी से विजय पा सकती है, इसका आज उन्हें जीवन में पहला अनुभव हुआ।
वह दौड़ती-हाँफती चली आ रही थी। वही कलूटी युवती, हाथ में एक झाड़ लिए हुए। समीप आ कर मेहता को कहीं जाने को तैयार देख कर बोली - मैं वह जड़ी खोज लाई। अभी घिस कर लगाती हूँ,