वह केवल न अपने अधयवसाय, पुरुषार्थ और प्रतिभा से शहर में पुजता है। उसकी सलाहों की उपेक्षा न की जा सकती थी। इस विषय में अगर खन्ना उनके पथ-प्रदर्शक हो जायँ, तो उन्हें बहुत कुछ कामयाबी हो सकती है। ऐसा अवसर क्यों छोड़ा जाय? तरह-तरह के प्रश्न करते रहे।
सहसा एक देहाती एक बड़ी-सी टोकरी में कुछ जड़ें, कुछ पत्तियाँ, कुछ फूल लिए, जाता नजर आया।
खन्ना ने पूछा - अरे, क्या बेचता है?
देहाती सकपका गया। डरा, कहीं बेगार में न पकड़ जाए। बोला - कुछ तो नहीं मालिक यही घास-पात है?'
वह केवल न अपने अधयवसाय, पुरुषार्थ और प्रतिभा से शहर में पुजता है। उसकी सलाहों की उपेक्षा न की जा सकती थी। इस विषय में अगर खन्ना उनके पथ-प्रदर्शक हो जायँ, तो उन्हें बहुत कुछ कामयाबी हो सकती है। ऐसा अवसर क्यों छोड़ा जाय? तरह-तरह के प्रश्न करते रहे।
सहसा एक देहाती एक बड़ी-सी टोकरी में कुछ जड़ें, कुछ पत्तियाँ, कुछ फूल लिए, जाता नजर आया।
खन्ना ने पूछा - अरे, क्या बेचता है?
देहाती सकपका गया। डरा, कहीं बेगार में न पकड़ जाए। बोला - कुछ तो नहीं मालिक यही घास-पात है?'