गोदान - Godan

खुर्शेद ने रूमाल से माथे का पसीना पोंछ कर कहा - आज तो शिकार खेलने के लायक दिन नहीं है। आज तो कोई मुशायरा होना चाहिए था।

वकील ने समर्थन किया - जी हाँ, वहीं बाग में। बड़ी बहार रहेगी।

थोड़ी देर के बाद मिस्टर तंखा ने मामले की बात छेड़ी।

'अबकी चुनाव में बड़े-बड़े गुल खिलेंगे! आपके लिए भी मुश्किल है।'

मिर्जा विरक्त मन से बोले - अबकी मैं खड़ा ही न हूँगा।

तंखा ने पूछा - क्यों?

'मुफ्त की बकबक कौन करे? फायदा ही क्या!


447 of 1753

खुर्शेद ने रूमाल से माथे का पसीना पोंछ कर कहा - आज तो शिकार खेलने के लायक दिन नहीं है। आज तो कोई मुशायरा होना चाहिए था।

वकील ने समर्थन किया - जी हाँ, वहीं बाग में। बड़ी बहार रहेगी।

थोड़ी देर के बाद मिस्टर तंखा ने मामले की बात छेड़ी।

'अबकी चुनाव में बड़े-बड़े गुल खिलेंगे! आपके लिए भी मुश्किल है।'

मिर्जा विरक्त मन से बोले - अबकी मैं खड़ा ही न हूँगा।

तंखा ने पूछा - क्यों?

'मुफ्त की बकबक कौन करे? फायदा ही क्या!


447 of 1753