खुर्शेद ने रूमाल से माथे का पसीना पोंछ कर कहा - आज तो शिकार खेलने के लायक दिन नहीं है। आज तो कोई मुशायरा होना चाहिए था।
वकील ने समर्थन किया - जी हाँ, वहीं बाग में। बड़ी बहार रहेगी।
थोड़ी देर के बाद मिस्टर तंखा ने मामले की बात छेड़ी।
'अबकी चुनाव में बड़े-बड़े गुल खिलेंगे! आपके लिए भी मुश्किल है।'
मिर्जा विरक्त मन से बोले - अबकी मैं खड़ा ही न हूँगा।
तंखा ने पूछा - क्यों?
'मुफ्त की बकबक कौन करे? फायदा ही क्या!
खुर्शेद ने रूमाल से माथे का पसीना पोंछ कर कहा - आज तो शिकार खेलने के लायक दिन नहीं है। आज तो कोई मुशायरा होना चाहिए था।
वकील ने समर्थन किया - जी हाँ, वहीं बाग में। बड़ी बहार रहेगी।
थोड़ी देर के बाद मिस्टर तंखा ने मामले की बात छेड़ी।
'अबकी चुनाव में बड़े-बड़े गुल खिलेंगे! आपके लिए भी मुश्किल है।'
मिर्जा विरक्त मन से बोले - अबकी मैं खड़ा ही न हूँगा।
तंखा ने पूछा - क्यों?
'मुफ्त की बकबक कौन करे? फायदा ही क्या!