लकड़हारे ने सकुचाते हुए कहा - बहुत भारी है सरकार!
'तो लाओ, कुछ दूर मैं ले चलूँ।'
लकड़हारा हँसा। मिर्जा डील-डौल में उससे कहीं ऊँचे और मोटे-ताजे थे, फिर भी वह दुबला-पतला आदमी उनकी इस बात पर हँसा। मिर्जा जी पर जैसे चाबुक पड़ गया।
'तुम हँसे क्यों? क्या तुम समझते हो, मैं इसे नहीं उठा सकता?'
लकड़हारे ने मानो क्षमा माँगी - सरकार आप बड़े आदमी हैं। बोझ उठाना तो हम-जैसे मजूरों का ही काम है।
'मैं तुम्हारा दुगुना जो हूँ!'
लकड़हारे ने सकुचाते हुए कहा - बहुत भारी है सरकार!
'तो लाओ, कुछ दूर मैं ले चलूँ।'
लकड़हारा हँसा। मिर्जा डील-डौल में उससे कहीं ऊँचे और मोटे-ताजे थे, फिर भी वह दुबला-पतला आदमी उनकी इस बात पर हँसा। मिर्जा जी पर जैसे चाबुक पड़ गया।
'तुम हँसे क्यों? क्या तुम समझते हो, मैं इसे नहीं उठा सकता?'
लकड़हारे ने मानो क्षमा माँगी - सरकार आप बड़े आदमी हैं। बोझ उठाना तो हम-जैसे मजूरों का ही काम है।
'मैं तुम्हारा दुगुना जो हूँ!'