बालक ने हिरन पर बैठ कर अपना कब्जा सिद्ध कर दिया और बोला - बापू तो लाए हैं।
बहन ने सिखाया - कह दे भैया, तुम्हारा है।
इन बच्चों की माँ बकरी के लिए पत्तियाँ तोड़ रही थी। दो नए भले आदमियों को देख कर जरा-सा घूँघट निकाल लिया और शरमाई कि उसकी साड़ी कितनी मैली, कितनी फटी, कितनी उटंगी है। वह इस वेश में मेहमानों के सामने कैसे जाय? और गए बिना काम नहीं चलता। पानी-वानी देना है।
अभी दोपहर होने में कुछ कसर थी, लेकिन मिर्जा साहब
बालक ने हिरन पर बैठ कर अपना कब्जा सिद्ध कर दिया और बोला - बापू तो लाए हैं।
बहन ने सिखाया - कह दे भैया, तुम्हारा है।
इन बच्चों की माँ बकरी के लिए पत्तियाँ तोड़ रही थी। दो नए भले आदमियों को देख कर जरा-सा घूँघट निकाल लिया और शरमाई कि उसकी साड़ी कितनी मैली, कितनी फटी, कितनी उटंगी है। वह इस वेश में मेहमानों के सामने कैसे जाय? और गए बिना काम नहीं चलता। पानी-वानी देना है।
अभी दोपहर होने में कुछ कसर थी, लेकिन मिर्जा साहब