गोदान - Godan

धनिया! मेरे ऊपर कोई भूत सवार था। इसका मुझे कितना दु:ख हुआ है, वह मैं ही जानता हूँ।

और जो मैं भी क्रोध में डूब मरी होती!'

तो क्या मैं रोने के लिए बैठा रहता? मेरी लहास भी तेरे साथ चिता पर जाती।'

'अच्छा चुप रहो, बेबात की बात मत करो।'

'गाय गई सो गई, मेरे सिर पर एक विपत्ति डाल गई। पुनिया की फिकर मुझे मारे डालती है।'

'इसीलिए तो कहते हैं, भगवान घर का बड़ा न बनाए। छोटों को कोई नहीं हँसता। नेकी-बदी सब बड़ों के सिर जाती है।'


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धनिया! मेरे ऊपर कोई भूत सवार था। इसका मुझे कितना दु:ख हुआ है, वह मैं ही जानता हूँ।

और जो मैं भी क्रोध में डूब मरी होती!'

तो क्या मैं रोने के लिए बैठा रहता? मेरी लहास भी तेरे साथ चिता पर जाती।'

'अच्छा चुप रहो, बेबात की बात मत करो।'

'गाय गई सो गई, मेरे सिर पर एक विपत्ति डाल गई। पुनिया की फिकर मुझे मारे डालती है।'

'इसीलिए तो कहते हैं, भगवान घर का बड़ा न बनाए। छोटों को कोई नहीं हँसता। नेकी-बदी सब बड़ों के सिर जाती है।'


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