घबड़ा कर बोला - झुनिया ने कुछ कहा? नहीं, गोबर कहाँ गया? उससे कह कर ही गया होगा?
धनिया झुँझला कर बोली - तुम्हारी अक्कल तो घास खा गई है। उसकी चहेती तो यहाँ बैठी है, भाग कर जायगा कहाँ? यहीं कहीं छिपा बैठा होगा। दूध थोड़े ही पीता है कि खो जायगा। मुझे तो इस कलमुँही झुनिया की चिंता है कि इसे क्या करूँ? अपने घर में मैं तो छन-भर भी न रहने दूँगी। जिस दिन गाय लाने गया है, उसी दिन दोनों में ताक-झाँक होने लगी। पेट न रहता तो अभी बात न खुलती। मगर जब पेट रह गया,
घबड़ा कर बोला - झुनिया ने कुछ कहा? नहीं, गोबर कहाँ गया? उससे कह कर ही गया होगा?
धनिया झुँझला कर बोली - तुम्हारी अक्कल तो घास खा गई है। उसकी चहेती तो यहाँ बैठी है, भाग कर जायगा कहाँ? यहीं कहीं छिपा बैठा होगा। दूध थोड़े ही पीता है कि खो जायगा। मुझे तो इस कलमुँही झुनिया की चिंता है कि इसे क्या करूँ? अपने घर में मैं तो छन-भर भी न रहने दूँगी। जिस दिन गाय लाने गया है, उसी दिन दोनों में ताक-झाँक होने लगी। पेट न रहता तो अभी बात न खुलती। मगर जब पेट रह गया,