चाहे मारो चाहे काटो, लेकिन अपने द्वार से दुरदुराओ मत।
होरी ने झुक कर उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए प्यार-भरे स्वर में कहा - डर मत बेटी, डर मत। तेरा घर है, तेरा द्वार है, तेरे हम हैं। आराम से रह। जैसी तू भोला की बेटी है, वैसी ही मेरी बेटी है। जब तक हम जीते हैं, किसी बात की चिंता मत कर। हमारे रहते, कोई तुझे तिरछी आँखों से न देख सकेगा। भोज-भात जो लगेगा, वह हम सब दे लेंगे, तू खातिर जमा रख।
झुनिया, सांत्वना पा कर और भी होरी के पैरों से चिमट गई और बोली - दादा,
चाहे मारो चाहे काटो, लेकिन अपने द्वार से दुरदुराओ मत।
होरी ने झुक कर उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए प्यार-भरे स्वर में कहा - डर मत बेटी, डर मत। तेरा घर है, तेरा द्वार है, तेरे हम हैं। आराम से रह। जैसी तू भोला की बेटी है, वैसी ही मेरी बेटी है। जब तक हम जीते हैं, किसी बात की चिंता मत कर। हमारे रहते, कोई तुझे तिरछी आँखों से न देख सकेगा। भोज-भात जो लगेगा, वह हम सब दे लेंगे, तू खातिर जमा रख।
झुनिया, सांत्वना पा कर और भी होरी के पैरों से चिमट गई और बोली - दादा,