रही थी कि रास्ते में पंडित दातादीन मिल गए। धनिया ने सिर नीचा कर लिया और चाहती थी कि कतरा कर निकल जाय, पर पंडित जी छेड़ने का अवसर पा कर कब चूकने वाले थे? छेड़ ही तो दिया - गोबर का कुछ सर-संदेस मिला कि नहीं धनिया? ऐसा कपूत निकला कि घर की सारी मरजाद बिगाड़ दी।
धनिया के मन में स्वयं यही भाव आते रहते थे। उदास मन से बोली - बुरे दिन आते हैं, बाबा, तो आदमी की मति फिर जाती है, और क्या कहूँ।
दातादीन बोले - तुम्हें इस दुष्टा
रही थी कि रास्ते में पंडित दातादीन मिल गए। धनिया ने सिर नीचा कर लिया और चाहती थी कि कतरा कर निकल जाय, पर पंडित जी छेड़ने का अवसर पा कर कब चूकने वाले थे? छेड़ ही तो दिया - गोबर का कुछ सर-संदेस मिला कि नहीं धनिया? ऐसा कपूत निकला कि घर की सारी मरजाद बिगाड़ दी।
धनिया के मन में स्वयं यही भाव आते रहते थे। उदास मन से बोली - बुरे दिन आते हैं, बाबा, तो आदमी की मति फिर जाती है, और क्या कहूँ।
दातादीन बोले - तुम्हें इस दुष्टा