कालीन और महफिल के सामान मँगनी दे कर लोगों का उबार कर देते थे। मौका पा कर न चूकते थे, पर जिसका खाते थे, उसका काम भी करते थे।
बोले - यह तुमने क्या रोग पाल लिया होरी?
होरी ने पीछे फिर कर पूछा - तुमने क्या कहा? लाला - मैंने सुना नहीं।
पटेश्वरी पीछे से कदम बढ़ाते हुए बराबर आ कर बोले - यही कह रहा था कि धनिया के साथ क्या तुम्हारी बुद्धि भी घास खा गई? झुनिया को क्यों नहीं उसके बाप के घर भेज देते, सेंत-मेंत में अपने हँसी
कालीन और महफिल के सामान मँगनी दे कर लोगों का उबार कर देते थे। मौका पा कर न चूकते थे, पर जिसका खाते थे, उसका काम भी करते थे।
बोले - यह तुमने क्या रोग पाल लिया होरी?
होरी ने पीछे फिर कर पूछा - तुमने क्या कहा? लाला - मैंने सुना नहीं।
पटेश्वरी पीछे से कदम बढ़ाते हुए बराबर आ कर बोले - यही कह रहा था कि धनिया के साथ क्या तुम्हारी बुद्धि भी घास खा गई? झुनिया को क्यों नहीं उसके बाप के घर भेज देते, सेंत-मेंत में अपने हँसी