गोदान - Godan

कालीन और महफिल के सामान मँगनी दे कर लोगों का उबार कर देते थे। मौका पा कर न चूकते थे, पर जिसका खाते थे, उसका काम भी करते थे।

बोले - यह तुमने क्या रोग पाल लिया होरी?

होरी ने पीछे फिर कर पूछा - तुमने क्या कहा? लाला - मैंने सुना नहीं।

पटेश्वरी पीछे से कदम बढ़ाते हुए बराबर आ कर बोले - यही कह रहा था कि धनिया के साथ क्या तुम्हारी बुद्धि भी घास खा गई? झुनिया को क्यों नहीं उसके बाप के घर भेज देते, सेंत-मेंत में अपने हँसी


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कालीन और महफिल के सामान मँगनी दे कर लोगों का उबार कर देते थे। मौका पा कर न चूकते थे, पर जिसका खाते थे, उसका काम भी करते थे।

बोले - यह तुमने क्या रोग पाल लिया होरी?

होरी ने पीछे फिर कर पूछा - तुमने क्या कहा? लाला - मैंने सुना नहीं।

पटेश्वरी पीछे से कदम बढ़ाते हुए बराबर आ कर बोले - यही कह रहा था कि धनिया के साथ क्या तुम्हारी बुद्धि भी घास खा गई? झुनिया को क्यों नहीं उसके बाप के घर भेज देते, सेंत-मेंत में अपने हँसी


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