गोदान - Godan

पर सौ रुपए नकद और तीस मन अनाज डाँड़ लगाया जाए।

धनिया भरी सभा में रुँधे हुए कंठ से बोली - पंचो, गरीब को सता कर सुख न पाओगे, इतना समझ लेना। हम तो मिट जाएँगे, कौन जाने, इस गाँव में रहें या न रहें, लेकिन मेरा सराप तुमको भी जरूर लगेगा। मुझसे इतना कड़ा जरीबाना इसलिए लिया जा रहा है कि मैंने अपने बहू को क्यों अपने घर में रखा। क्यों उसे घर से निकाल कर सड़क की भिखारिन नहीं बना दिया। यही न्याय है-ऐं?

पटेश्वरी बोले - वह तेरी बहू नहीं है, हरजाई है।


576 of 1753

पर सौ रुपए नकद और तीस मन अनाज डाँड़ लगाया जाए।

धनिया भरी सभा में रुँधे हुए कंठ से बोली - पंचो, गरीब को सता कर सुख न पाओगे, इतना समझ लेना। हम तो मिट जाएँगे, कौन जाने, इस गाँव में रहें या न रहें, लेकिन मेरा सराप तुमको भी जरूर लगेगा। मुझसे इतना कड़ा जरीबाना इसलिए लिया जा रहा है कि मैंने अपने बहू को क्यों अपने घर में रखा। क्यों उसे घर से निकाल कर सड़क की भिखारिन नहीं बना दिया। यही न्याय है-ऐं?

पटेश्वरी बोले - वह तेरी बहू नहीं है, हरजाई है।


576 of 1753