तुम्हें क्या मारेंगी। उनको जो कुछ कहना होगा, मुझे कहेंगी, तुमसे तो बोलेंगी भी नहीं।
गाँव समीप आ गया। गोबर ने ठिठक कर कहा - अब तुम जाओ।
झुनिया ने अनुरोध किया - तुम भी देर न करना'
'नहीं-नहीं, छन भर में आता हूँ, तू चल तो।'
'मेरा जी न जाने कैसा हो रहा है! तुम्हारे ऊपर क्रोध आता है।'
'तुम इतना डरती क्यों हो? मैं तो आ ही रहा हूँ।'
'इससे तो कहीं अच्छा था कि किसी दूसरी जगह भाग चलते।'
'जब अपना घर है तो क्यों कहीं भागें? तुम नाहक डर रही हो।'
तुम्हें क्या मारेंगी। उनको जो कुछ कहना होगा, मुझे कहेंगी, तुमसे तो बोलेंगी भी नहीं।
गाँव समीप आ गया। गोबर ने ठिठक कर कहा - अब तुम जाओ।
झुनिया ने अनुरोध किया - तुम भी देर न करना'
'नहीं-नहीं, छन भर में आता हूँ, तू चल तो।'
'मेरा जी न जाने कैसा हो रहा है! तुम्हारे ऊपर क्रोध आता है।'
'तुम इतना डरती क्यों हो? मैं तो आ ही रहा हूँ।'
'इससे तो कहीं अच्छा था कि किसी दूसरी जगह भाग चलते।'
'जब अपना घर है तो क्यों कहीं भागें? तुम नाहक डर रही हो।'