गोदान - Godan


रूपा ने होरी की टाँगो में लिपट कर कहा - काका! देखो, मैंने एक ढेला भी नहीं छोड़ा। बहन कहती है, जा पेड़ तले बैठ। ढेले न तोड़े जाएँगे काका, तो मिट्टी कैसे बराबर होगी?

होरी ने उसे गोद में उठा प्यार करते हुए कहा - तूने बहुत अच्छा किया बेटी, चल घर चलें। कुछ देर अपने विद्रोह को दबाए रहने के बाद गोबर बोला - यह तुम रोज-रोज मालिकों की खुशामद करने क्यों जाते हो? बाकी न चुके तो प्यादा आ कर गालियाँ सुनाता है, बेगार देनी ही पड़ती है,


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रूपा ने होरी की टाँगो में लिपट कर कहा - काका! देखो, मैंने एक ढेला भी नहीं छोड़ा। बहन कहती है, जा पेड़ तले बैठ। ढेले न तोड़े जाएँगे काका, तो मिट्टी कैसे बराबर होगी?

होरी ने उसे गोद में उठा प्यार करते हुए कहा - तूने बहुत अच्छा किया बेटी, चल घर चलें। कुछ देर अपने विद्रोह को दबाए रहने के बाद गोबर बोला - यह तुम रोज-रोज मालिकों की खुशामद करने क्यों जाते हो? बाकी न चुके तो प्यादा आ कर गालियाँ सुनाता है, बेगार देनी ही पड़ती है,


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