मजूरी पेशगी दे दे। ऐसे झक्कड़ आदमी का क्या भरोसा!
गोबर ने डरते-डरते कहा - मालिक, हमारे पास कुछ खाने को नहीं है। पैसे मिल जायँ तो कुछ ले कर खा लूँ।
मिर्जा ने झट छ: आने पैसे उसके हाथ में रख दिए और ललकार कर बोले - मजूरी सबको चलते-चलते पेशगी दे दी जायगी। इसकी चिंता मत करो।
मिर्जा साहब ने शहर के बाहर थोड़ी-सी जमीन ले रखी थी। मजूरों ने जा कर देखा, तो एक बड़ा अहाता घिरा हुआ था और उसके अंदर केवल एक छोटी-सी फूस की झोपड़ी थी,
मजूरी पेशगी दे दे। ऐसे झक्कड़ आदमी का क्या भरोसा!
गोबर ने डरते-डरते कहा - मालिक, हमारे पास कुछ खाने को नहीं है। पैसे मिल जायँ तो कुछ ले कर खा लूँ।
मिर्जा ने झट छ: आने पैसे उसके हाथ में रख दिए और ललकार कर बोले - मजूरी सबको चलते-चलते पेशगी दे दी जायगी। इसकी चिंता मत करो।
मिर्जा साहब ने शहर के बाहर थोड़ी-सी जमीन ले रखी थी। मजूरों ने जा कर देखा, तो एक बड़ा अहाता घिरा हुआ था और उसके अंदर केवल एक छोटी-सी फूस की झोपड़ी थी,