आप अपने धर्म का पालन किए जाइए।
खन्ना बोले - मालती की तो गर्दन ही नहीं उठती।
रायसाहब ने इन विचारों का समर्थन किया - मेहता कहते तो यथार्थ ही हैं।
'बिजली' संपादक बिगड़े - मगर कोई बात तो नहीं कही। नारी-आंदोलन के विरोधी इन्हीं ऊटपटाँग बातों की शरण लिया करते हैं। मैं इसे मानता ही नहीं कि त्याग और प्रेम से संसार ने उन्नति की। संसार ने उन्नति की है पौरूष से, पराक्रम से, बुद्धि-बल से, तेज से।
खुर्शेद ने कहा - अच्छा, सुनने दीजिएगा या अपनी ही गाए जाइएगा?
आप अपने धर्म का पालन किए जाइए।
खन्ना बोले - मालती की तो गर्दन ही नहीं उठती।
रायसाहब ने इन विचारों का समर्थन किया - मेहता कहते तो यथार्थ ही हैं।
'बिजली' संपादक बिगड़े - मगर कोई बात तो नहीं कही। नारी-आंदोलन के विरोधी इन्हीं ऊटपटाँग बातों की शरण लिया करते हैं। मैं इसे मानता ही नहीं कि त्याग और प्रेम से संसार ने उन्नति की। संसार ने उन्नति की है पौरूष से, पराक्रम से, बुद्धि-बल से, तेज से।
खुर्शेद ने कहा - अच्छा, सुनने दीजिएगा या अपनी ही गाए जाइएगा?