ओंकारनाथ ने टीका की - लेकिन बातें सभी पुरानी हैं, सड़ी हुई।
'पुरानी बात भी आत्मबल के साथ कही जाती है, तो नई हो जाती है।'
'जो एक हजार रुपए हर महीने फटकार कर विलास में उड़ाता हो, उसमें आत्मबल जैसी वस्तु नहीं रह सकती। यह केवल पुराने विचार की नारियों और पुरुषों को प्रसन्न करने के ढंग हैं।'
खन्ना ने मालती की ओर देखा - यह क्यों फूली जा रही है? इन्हें तो शरमाना चाहिए।
खुर्शेद ने खन्ना को उकसाया - अब तुम भी एक तकरीर कर डालो खन्ना,
ओंकारनाथ ने टीका की - लेकिन बातें सभी पुरानी हैं, सड़ी हुई।
'पुरानी बात भी आत्मबल के साथ कही जाती है, तो नई हो जाती है।'
'जो एक हजार रुपए हर महीने फटकार कर विलास में उड़ाता हो, उसमें आत्मबल जैसी वस्तु नहीं रह सकती। यह केवल पुराने विचार की नारियों और पुरुषों को प्रसन्न करने के ढंग हैं।'
खन्ना ने मालती की ओर देखा - यह क्यों फूली जा रही है? इन्हें तो शरमाना चाहिए।
खुर्शेद ने खन्ना को उकसाया - अब तुम भी एक तकरीर कर डालो खन्ना,