गोदान - Godan

खत्म। ऐसे-ऐसे बेशुमार मेहते आएँगे और चले जाएँगे और दुनिया अपनी रफ्तार से चलती रहेगी। बिगड़ने की कौन-सी बात है?

'असत्य सुन कर मुझसे सहा नहीं जाता।'

रायसाहब ने उन्हें और चढ़ाया - कुलटा के मुँह से सतियों की-सी बात सुन कर किसका जी न जलेगा!

ओंकारनाथ फिर बैठ गए। मेहता का भाषण जारी था..

'मैं आपसे पूछता हूँ, क्या बाज को चिड़ियों का शिकार करते देख कर हंस को यह शोभा देगा कि वह मानसरोवर की आनंदमयी शांति को छोड़ कर चिड़ियों का शिकार करने लगे? और अगर वह शिकारी बन जाए,


745 of 1753

खत्म। ऐसे-ऐसे बेशुमार मेहते आएँगे और चले जाएँगे और दुनिया अपनी रफ्तार से चलती रहेगी। बिगड़ने की कौन-सी बात है?

'असत्य सुन कर मुझसे सहा नहीं जाता।'

रायसाहब ने उन्हें और चढ़ाया - कुलटा के मुँह से सतियों की-सी बात सुन कर किसका जी न जलेगा!

ओंकारनाथ फिर बैठ गए। मेहता का भाषण जारी था..

'मैं आपसे पूछता हूँ, क्या बाज को चिड़ियों का शिकार करते देख कर हंस को यह शोभा देगा कि वह मानसरोवर की आनंदमयी शांति को छोड़ कर चिड़ियों का शिकार करने लगे? और अगर वह शिकारी बन जाए,


745 of 1753