या दफ्तरों में और अदालतों में जबान और कलम चलाने से? इन नकली, अप्राकृतिक, विनाशकारी अधिकारों के लिए आप वह अधिकार छोड़ देना चाहती हैं, जो आपको प्रकृति ने दिए हैं?
सरोज अब तक बड़ी बहन के अदब से जब्त किए बैठी थी। अब न रहा गया। फुफकार उठी - हमें वोट चाहिए, पुरुषों के बराबर।
और कई युवतियों ने हाँक लगाई - वोट! वोट!
ओंकारनाथ ने खड़े हो कर ऊँचे स्वर से कहा - नारी-जाति के विरोधियों की पगड़ी नीची हो।
मालती ने मेज पर हाथ पटक कर कहा - शांत रहो,
या दफ्तरों में और अदालतों में जबान और कलम चलाने से? इन नकली, अप्राकृतिक, विनाशकारी अधिकारों के लिए आप वह अधिकार छोड़ देना चाहती हैं, जो आपको प्रकृति ने दिए हैं?
सरोज अब तक बड़ी बहन के अदब से जब्त किए बैठी थी। अब न रहा गया। फुफकार उठी - हमें वोट चाहिए, पुरुषों के बराबर।
और कई युवतियों ने हाँक लगाई - वोट! वोट!
ओंकारनाथ ने खड़े हो कर ऊँचे स्वर से कहा - नारी-जाति के विरोधियों की पगड़ी नीची हो।
मालती ने मेज पर हाथ पटक कर कहा - शांत रहो,