जी से कहा - इसका जवाब तो आपके पास भी न होगा?
संपादक जी ने विरक्त मन से कहा - सारे व्याख्यान में इन्होंने यही एक बात सत्य कही है।
'तब तो आप भी मेहता के मुरीद हुए!'
'जी नहीं, अपने लोग किसी के मुरीद नहीं होते। मैं इसका जवाब ढूँढ निकालूँगा, 'बिजली' में देखिएगा।'
'इसके माने यह हैं कि आप हक की तलाश नहीं करते, सिर्फ अपने पक्ष के लिए लड़ना चाहते हैं।'
रायसाहब ने आड़े हाथों लिया - इसी पर आपको अपने सत्य-प्रेम का अभिमान है?
जी से कहा - इसका जवाब तो आपके पास भी न होगा?
संपादक जी ने विरक्त मन से कहा - सारे व्याख्यान में इन्होंने यही एक बात सत्य कही है।
'तब तो आप भी मेहता के मुरीद हुए!'
'जी नहीं, अपने लोग किसी के मुरीद नहीं होते। मैं इसका जवाब ढूँढ निकालूँगा, 'बिजली' में देखिएगा।'
'इसके माने यह हैं कि आप हक की तलाश नहीं करते, सिर्फ अपने पक्ष के लिए लड़ना चाहते हैं।'
रायसाहब ने आड़े हाथों लिया - इसी पर आपको अपने सत्य-प्रेम का अभिमान है?