उनके लिए मैं आपका अभारी हूँ, लेकिन यहाँ सिद्धांत की बात आ गई है और आप तो जानते हैं, सिद्धांत प्राणों से भी प्यारे होते हैं।
रायसाहब कुरसी पर बैठ कर जरा मीठे स्वर में बोले - अच्छा भाई, जो चाहे लिखो। मैं तुम्हारे सिद्धांत को तोड़ना नहीं चाहता। और तो क्या होगा, बदनामी होगी। हाँ, कहाँ तक नाम के पीछे मरूँ! कौन ऐसा ताल्लुकेदार है, जो असामियों को थोड़ा-बहुत नहीं सताता ? कुत्ता हड्डी की रखवाली करे तो खाए क्या? मैं इतना ही कर
उनके लिए मैं आपका अभारी हूँ, लेकिन यहाँ सिद्धांत की बात आ गई है और आप तो जानते हैं, सिद्धांत प्राणों से भी प्यारे होते हैं।
रायसाहब कुरसी पर बैठ कर जरा मीठे स्वर में बोले - अच्छा भाई, जो चाहे लिखो। मैं तुम्हारे सिद्धांत को तोड़ना नहीं चाहता। और तो क्या होगा, बदनामी होगी। हाँ, कहाँ तक नाम के पीछे मरूँ! कौन ऐसा ताल्लुकेदार है, जो असामियों को थोड़ा-बहुत नहीं सताता ? कुत्ता हड्डी की रखवाली करे तो खाए क्या? मैं इतना ही कर